
भारतीय रेल- दुनिया की चौथी सबसे बड़े पैमाने पर चलने वाली रेल सेवा। ये वो भारतीय रेल है जो प्रतिदिन २० मिल्लियन यात्रियो को उनकी मंजिल तक सुरक्षित पहुंचाती है। २ मिल्लियन टन माल दैनिक पैमाने पर उचित स्थानों पर पहुंचाती है और लगभग १.६ मिल्लियन नागरिको को रोज़गार प्रदान करती है।
इन सब उपलब्धियों के अलावा यदि इस चमकते सिक्के को पलट के इसका दूसरा पहलु देखा जाये तो एक धूमिल दृश्य उभर के सामने आता है। आप के समक्ष एक व्यक्तिगत अनुभव का विस्तार पूर्वक लेखन कर रही हूँ।
बात ०३ अप्रैल २०१० की है। मेरे एम्.एस सी के फ़ाइनल इम्तिहान ख़तम हुए तो मन में विचार आया की छुट्टियों में घर हो आती हूँ। मैंने आखिरी इम्तिहान दे कर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस(८२३७) से यमुना नगर आने का कार्य क्रम बनाया। ये गाडी गाजिआबाद से रात्री ९:०० प्रस्थान करती है।
मै गाडी क निर्धारित समय अनुसार ठीक ८:३० मिनट पर गाजिआबाद रेलवे स्टेशन पहुँच गयी। वह जा कर पता चला की गाडी १५ मिनट की देरी से आएगी। मै इसी सोच में डूब कर गाडी का इंतज़ार करने लगी की आखिर ये भारतीय रेल कभी निर्धारित समय क अनुसार क्यों नहीं चलती? ख़ैर १५ मिनट गुज़र चुके थे तब भी गाडी लापता।
अब रात के पौने दस बज चुके थे । तभी एक घोषणा हुई की ८२३७ छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस कुछ ही समय में प्लेट फॉर्म नंबर १ पर आ रही है। ये सुन कर दिल को बड़ी राहत मिली की चलो गाडी चाहे ४५ मिनट की देरी से आई कम से कम आई तो सही। मुझे २- ४ घंटे तो इंतज़ार नहीं करना पड़ा।
मैंने ट्रेन के भीतर प्रवेश कर अपना स्थान ग्रहन किया और निद्रा की आवस्था को प्राप्त करने के प्रयास में जुट गयी। लगभग १ घंटे का सफ़र तय करने के बाद गाडी मेरठ शेहर पहुंची। वहाँ गाडी को ३० मिनट का स्टॉप दिया गया। फिर १०-१५ मिनट आगे का सफ़र तय करने के बाद गाडी को १:३० घंटा मेरठ छावनी में रोके रखा गया। लगभग १:३० घंटे बाद गाडी को मेरठ छावनी से चलाया गया तो सिलसिला कुछ यू चला की क्या बताओं। गाडी मुश्किल से १० मिनट चलती होगी फिर उसे कभी २५ मिनट तो कभी १० मिनट के लिए जगह जगह रोक दिया जाता। मेरठ छावनी से मुज्ज़फरनगर तक यही खेल चलता रहा।
दरअसल इस घटना के पीछे कारण ये था की जिस रास्ते से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस नयी
दिल्ली से अमृतसर को जाती है वो सिंगल ट्रैक रूट है। ये वही रूट है जो नयी दिल्ली को अम्बाला से मेरठ - मुज्ज़फर नगर के रास्ते जोड़ता है। इस रूट के सिंगल ट्रैक होने की वजह से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से ५ गाडियों को पास दिलाया गया। जिसके कारण जो छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस गाजिआबाद से यमुना नगर तक का सफ़र ५ घंटे में तय करती है उसे यही सफ़र तय करने में ८ घंटे का समय लगा।
ऐसे में सवाल यह उठता है की जब ये दिल्ली अम्बाला रूट इतना व्यस्त रूट है तो इसे डबल ट्रैक रूट क्यों नहीं बनाया जाता? इस से भी ज्यादा चोकाने वाली बात तो ये है की इसी सिंगल लाइन रूट की विद्युतीकरण का काम भी तेज़ी से चल रहा है।
अब प्रश्न उठता है की क्या हमारी देश की प्रशासन इतनी नासमझ है की ये निर्णय भी न ले सके की किस जगह किस समय कौन सा काम होना चाहिए ? क्या हमारे देश में भ्रष्ट अधिकारियों की आँखों पर काली पट्टी इस तरह बंधी हुई है की उन्हें देश की जनता की ज़रूरत दिखाई ही नहीं देती? क्या उन्हें विद्युतीकरण की जगह रूट को डबल ट्रैक करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती? क्यों सिंगल लाइन ट्रैक के विद्यितुकरण प्रक्रिया में देश का पैसा पानी की तरह बहा कर बर्बाद किया जा रहा है?
क्यों अपनी आँखों पर काली ओढनी ओढ़े बैठा है प्रशासन ? क्यों नहीं कोई उचित कार्यवाही होती? क्यों नहीं जमाखोरों के खिलाफ सख्त कदम उठाये जाते? क्यों अपने वर्चस्व को और दाग दार और छवि को धूमिल बनाना चाहते है देश के अधिकारी? क्यों नहीं पूरी की जाती करोडो नागरिको की उम्मीदे? इन्ही मुश्किलों का सामना करती रहे आम जनता आखिर कब तक ? इन बद से बदतर होते हालातो से लडती रहे आम जनता आखिर कब तक?
अब आप ही बताइए अगर देश का प्रशासन यूं ही आलस की गहेन निद्रा में सोता रहा और भ्रष्ट अधिकारी पैसे से अपनी भूख मिटाते रहे तो क्या कभी भारतीय रेल कभी तरक्की कर पायेगी? क्या भारतीय रेल कभी तय वक़्त सीमा पर चल पायेगी? क्या भारतीय रेल कभी करोडो लोगो की आशाओं को पूरा कर पायेगी?

good piece of litearature.....was inspiring {hope it gets surfaced}....should be an eye opener for those railway ministry official...in case he/she browse through it...
ReplyDeletenice narration....hope this is read by railway ministers........
ReplyDeleteThis not the question for only one route...
ReplyDeleteIt happens in many places.....
Electrification is good thing...but first the Routes should be doubled....
Otherwise, the problem remains there only...
Thanks...
यह भारतीय रेलवे की एक बेवकूफाना हरकत है। खुर्जा से हापुड और आगे मेरठ सहारनपुर तक पूरा सिंगल ट्रैक है और इसे ही विद्युतिकृत किया जा रहा है। गाजियाबाद-मेरठ वाले खण्ड को छेडा भी नहीं जा रहा।
ReplyDeleteरेलवे का तर्क है कि इससे कानपुर की तरफ से आने वाली और अम्बाला/अमृतसर/जम्मू जाने वाली मालगाडियों को दिल्ली में नहीं घुसना पडेगा।
लेकिन उस हालत में इस रूट के हालात और बिगड जायेंगे।
एक बेहतरीन विवरण रेलवे के अक्षम और अयोग्य प्रबंधन का!!!!!!!!
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