


आज एक बार फिर कोहरे की सफ़ेद चादर से झांकती सुन्हेरी किरणे सुबह को और भी सुरमई बना रही थी। एक और जहा पक्षियों की चेहचाहट से वातावरण और भी संगीतमयी हो रहा था और ताज़ा पुष्प लताएं भीनी भीनी खुशबू हवा में बिखरा के एक नए दिन का स्वागत कर रही थी वही दूसरी और दौड़ती भागती दुनिया भी कम हसीन नहीं थी। सभी लोग जल्दी में सडको पे अपनी गाडी दौड़ाते नज़र आ रहे थे । किसी को दफ्तर पहुँचने की जल्दी तो किसी को बच्चे को स्कूल बस में चढ़ाना है। किसी को कॉलेज पहुँचने की जल्दी मगर रास्ते में जाम इतना की ये तो पक्का निश्चय हो जाये की घर से समय पर निकलने के बावजूद भी पहली क्लास में देरी से पहुंचना तो तेय है, और अगर अध्यापक जी ने कक्षा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी तो पहली क्लास तो मिस करनी पड़ेगी और इसका नतीजा होगा अटेंडेंस शोर्ट..फिर भी भुगतान तो हमे ही करना पड़ेगा। खैर ये तो हुई आपकी और हमारी बात।
इस सुहानी सुबह के सफ़र में और कोई भी है जिसे हम सबसे भी ज्यादा तकलीफों का सामना करना पड़ता है। आप सोच रहे होंगे ऐसा कौन है भाई ? तो आईये आपका परिचय करवाते है एक लाल बत्ती से। जी हाँ ये लाल बत्ती ही है जिसे दिन भर आप और हम सबसे ज्यादा तकलीफों का सामना करना पड़ता है। आज आपके समक्ष एक लाल बत्ती की दास्ताँ प्रस्तुत करने जा रही हूँ।
ये कहानी है उसी लाल बत्ती की जो नॉएडा सेक्टर ५५ में होटल पार्क प्लाज़ा के बिलकुल सामने है। पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ , इमानदारी से बिना थके , बिना आराम किये अपना फ़र्ज़ अदा करती नज़र आती है ये लाल बत्ती। सड़क पर आते जाते वाहनों को निर्देश देती नज़र आती है ये लाल बत्ती, मगर फिर भी इसे रोज़ एक असहाए पीड़ा को सेहेन करना पड़ता है । ये लाल बत्ती सड़क पे आते जाते वाहन चालको को उपयुक्त निर्देश देने के साथ एक आशा भरी नज़रो से लोगो को निहारती रहती है की शायद आज तो कोई इसकी तरफ ध्यान देगा..इसके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करेगा । दरअसल ये लाल बत्ती २४*७*३६५ चालू रहती है मगर अफ़सोस की इसके द्वारा दिए गए निर्देशों की अहेमियत किसी को नज़र नहीं आती, क्योकि इस सड़क से गुजरने वाले वाहन चालक कभी इस लाल बत्ती के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन ही नहीं करते और गाडी को सरपट फर्राटे से दौड़ाते हुए आगे निकल जाते है।
अगर कोई वाहन चालक लाल बत्ती होने पर एक सेकंड रुकता भी है तो वो भी एक दुसरे की देखा देखि में नियमो का उल्लंघन करने में नहीं हिचकिचाते। ये दास्ताँ केवल इसी लाल बत्ती की नहीं है। देश में न जाने कितनी लाल बत्तिया इसी तरह का अनुभव कर रही है। अब आप ही सोचिये अगर आप किसी के भले के लिए उसे कोई निर्देश दे और वो आपकी तरफ एक पल को भी ध्यान न दे तो आप कैसी अनुभव करेंगे?
कहते है - दुर्घटना से देर भली। इसीलिए हम सबको मिल के एक प्रण लेना चाहिए की त्रफ्फिक सिग्नल की अनदेखी और नियमो का उल्लंघन जैसी गतिविधियों को रुकने के लिए एकजुट हो इन्हें रोकने का प्रयास करेंगे।


