Saturday, November 7, 2009

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लाचार बचपन- क्या जीना इसी का नाम है?



ये फोटो शोप्प्रिक्स मॉल मॉल के बाहर घूमते एक नन्हे बच्चे की है । इसकी मासूम निगाहे और कोमल मुस्कान सबको एक साधारण सी बात लगेगी। परन्तु

वास्तव में यही मुस्कान हमे एक अहम् संदेश और प्रेरणा देती है, की जीवन में मनुष्य कैसी भी परिस्थिति में क्यो न हो परन्तु उसे हिम्मत और धैर्य से परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। इस मासूम मुस्कान के पीछे छिपी एक लाचारी भरी हकीक़त को प्रकाश में लाना चाहती हूँ।असल में यह फोटो मैंने उस वक्त ली है जब मैं दोस्तों के साथ शोप्प्रिक्स मॉल घुमने गई और वह ये देखा की यह एक बच्चा वह आते जाते लोगो से पैसे मांगता था । पहली नज़र में यह एक आम गतिविधि प्रतीत होती है । परन्तु एक असाधारण घटना तब प्रतीत हुई जब मैंने ये देखा की ये बच्चा अपनी मर्ज़ी से भीख नही मांग रहा था बल्कि एक २३-२४ वर्ष के व्यक्ति के निर्देशन में रहकरमांग रहा था जी इसे एक व्यक्ति से पैसा न मिलने पर दूसरे से भीख मांगने के लिए निर्देशित करता था ।

आज भले ही हम ख़ुद को २१वी सदी के नागरिक समझते है परन्तु आज के युग में भी समाज में न जाने कितने ही कुकर्म हो रहे है । जहाँ समाज के एक वर्ग के बच्चे अपना बचपन तमाम खुशियों के साथ जीते है , उसी बचपन का एक दूसरा पहलु लाचारी भरे बचपन के रूप में उभर कर सामने आता है । आज कल कुछ समाज में कुछ दूषित तत्वों के कारन समाज में बचपन भी प्रदूषित होता नज़र आता है। जब ऐसे ही न जाने कितने कितने बच्चो के विद्यालय जा कर अपना भविष्य उज्जवल बनाने के समय पर सरे आम कनूजं का उल्लंघन कर भीख मांगने जैसे घिनोने काम करवाए जाते है और कितने ही मासूम बच्चो का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है लेकिन आज कल भी प्रशासन गहरी नींद में सोता नज़र आ रहा है। आज भी दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध कोई भी कार्यवाहीहोती नही दिखती। जब आज भी समाज में ऐसी तमाम बुराईया यहाँ तहां देखने को मिलती है फ़िर भी क्यो सोया है प्रशासन?????

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